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    Home - Devotional - Anjali Jain की मधुर आवाज़ में Sukh Karta Dukh Harta Lyrics | भक्तिभाव से भरी ये गणपती आरती सुनते ही मन शांत हो जाता है
    Devotional

    Anjali Jain की मधुर आवाज़ में Sukh Karta Dukh Harta Lyrics | भक्तिभाव से भरी ये गणपती आरती सुनते ही मन शांत हो जाता है

    AjayBy AjayJune 23, 2026
    Anjali Jain की मधुर आवाज़ में Sukh Karta Dukh Harta Lyrics | भक्तिभाव से भरी ये गणपती आरती सुनते ही मन शांत हो जाता है

    Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics असल में महाराष्ट्र की सबसे पवित्र और सबसे ज़्यादा गाई जाने वाली गणपती आरती है, जिसे सत्रहवीं सदी के संत-कवि समर्थ रामदास स्वामी ने रचा था। गायिका अंजली जैन ने इसे 2017 में एक मराठी भक्ति एल्बम के तहत रिकॉर्ड किया, संगीत किशोर मल्होत्रा का है

    गणपती बाप्पा के नाम की शुरुआत होते ही सबसे पहले जो पंक्तियाँ ज़ेहन में गूँजती हैं, वो हैं “सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची” और यही वजह है कि Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics को गूगल पर हर साल गणेश चतुर्थी के आसपास सबसे ज़्यादा खोजा जाता है। यह कोई फ़िल्मी गाना नहीं, बल्कि सदियों पुरानी वो आरती है जो हर मराठी घर की पूजा में, हर गणपती पंडाल में और अब स्ट्रीमिंग ऐप्स पर भी उतनी ही श्रद्धा से बजती है। अंजली जैन की आवाज़ में यह आरती एक अलग गहराई ले आती है न बहुत भारी, न बहुत हल्की, बल्कि ठीक उतनी भावुक जितनी एक घरेलू पूजा के माहौल को चाहिए।

    Table of Contents

    Toggle
    • Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta – गाने की पूरी जानकारी (Overview)
    • Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics In Hindi – पूरी आरती
    • Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics English – Transliteration
    • Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics का गहरा भावार्थ — शब्द सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं हैं
    • शब्दों के पीछे छिपा भावार्थ — हर कड़वा क्या कहता है
      • पहला कड़वा — विश्वास और सुरक्षा का भाव
      • दूसरा कड़वा — शृंगार और भक्ति का मेल
      • तीसरा कड़वा — समर्पण और शरणागति
    • Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics — संगीत रचना और गायकी
    • तुलना: पारंपरिक आरती बनाम आधुनिक रिकॉर्डेड वर्जन
      • शब्दों का आध्यात्मिक प्रभाव
    • Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta – विशेष विश्लेषण
    • निष्कर्ष (conclusion)
    • अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
      • Sukh Karta Dukh Harta आरती किसने लिखी है?
      • Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics किस भाषा में हैं?
      • यह आरती किस अवसर पर गाई जाती है?
      • “संकटी पावावे” का सही अर्थ क्या है, “संकष्टी” नहीं?
      • क्या यह आरती किसी फ़िल्म का हिस्सा है?

    Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta – गाने की पूरी जानकारी (Overview)

    विवरण जानकारी
    गाने का शीर्षक Sukh Karta Dukh Harta (सुखकर्ता दुःखहर्ता)
    गायिका Anjali Jain
    संगीतकार Kishore Malhotra
    मूल रचयिता (गीतकार) Samarth Ramdas Swami (17वीं सदी के संत-कवि)
    एल्बम Sukh Karta Dukh Harta (Single, 2017)
    भाषा मराठी (काही ओळी हिंदी मिश्रित भक्ति परंपरेतून)
    शैली (Genre) भक्ति संगीत / गणपती आरती
    प्रकाशन वर्ष 2017
    अवधि लगभग 3:23 मिनट

    Disclaimer: ये lyrics Anjali Jain और Wings Entertainment Ltd के मूल कलाकारों की संपत्ति हैं। ये बोल केवल भक्ति, प्रशंसा और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए प्रस्तुत किए गए हैं। कृपया कलाकारों का समर्थन करें और इस आरती को JioSaavn, Spotify या YouTube पर सुनें।

    Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics In Hindi – पूरी आरती

    सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची।

    नुरवी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची।

    सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची।

    कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची॥
    जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।

    दर्शनमात्रे मनकामना पुरती॥

    जय देव जय देव॥
    रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा।

    चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा।

    हिरेजडित मुकुट शोभतो बरा।

    रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरिया॥
    जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।

    दर्शनमात्रे मनकामना पुरती॥

    जय देव जय देव॥
    लंबोदर पीतांबर फणिवरबंधना।

    सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना।

    दास रामाचा वाट पाहे सदना।

    संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना॥
    जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।

    दर्शनमात्रे मनकामना पुरती॥

    जय देव जय देव॥
    शेंदूर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुख को।

    दोंदिल लाल बिराजे सूत गौरीहर को।

    हाथ लिए गुड़ लड्डू साईं सुरवर को।

    महिमा कहे न जाय लागत हूँ पद को॥
    जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता।

    धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता॥

    जय देव जय देव॥

    Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics English – Transliteration

    Sukhkarta Dukhharta Varta Vighnachi

    Nurvi Purvi Prem Krupa Jayachi

    Sarvangi Sundar Uti Shendurachi

    Kanthi Jhalke Maal Muktaphalanchi
    Jai Dev Jai Dev Jai Mangalmurti

    Darshanmatre Manakamana Purti

    Jai Dev Jai Dev
    Ratnakhachit Phara Tuj Gaurikumara

    Chandanachi Uti Kumkumkeshara

    Hirejadit Mukut Shobhato Bara

    Runjhunati Nupure Charani Ghagariya
    Jai Dev Jai Dev Jai Mangalmurti

    Darshanmatre Manakamana Purti

    Jai Dev Jai Dev
    Lambodar Pitambar Phanivarvandana

    Saral Sond Vakratunda Trinayana

    Das Ramacha Vat Pahe Sadana

    Sankati Pavave Nirvani Rakshave Survarvandana
    Jai Dev Jai Dev Jai Mangalmurti

    Darshanmatre Manakamana Purti

    Jai Dev Jai Dev
    Shendur Laal Chadhayo Achchha Gajmukh Ko

    Dondil Laal Biraje Sut Gaurihar Ko

    Haath Liye Gud Laddu Sai Survar Ko

    Mahima Kahe Na Jaay Lagat Hoon Pad Ko
    Jai Jai Shri Ganaraj Vidya Sukhadata

    Dhanya Tumhara Darshan Mera Man Ramata

    Jai Dev Jai Dev

    Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics का गहरा भावार्थ — शब्द सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं हैं

    बोल पढ़ लेना अलग बात है, और उनके पीछे का भाव समझना बिल्कुल अलग। Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics को अगर सिर्फ शब्दों के रूप में देखा जाए तो यह एक सुंदर स्तुति भर लगेगी, लेकिन जब हर पंक्ति को अलग करके पढ़ा जाए, तो पता चलता है कि यह आरती दरअसल भक्त और भगवान के बीच के एक भावनात्मक संवाद की तरह लिखी गई है जहाँ हर कड़वा पिछले कड़वे से ज़्यादा गहरा समर्पण दिखाता है।

    शब्दों के पीछे छिपा भावार्थ — हर कड़वा क्या कहता है

    पहला कड़वा — विश्वास और सुरक्षा का भाव

    “सुखकर्ता दुःखहर्ता” कहते ही भक्त गणपती को सीधा “सुख देने वाला और दुःख हरने वाला” कह कर पुकारता है। यह कोई अलंकार नहीं, बल्कि सीधी प्रार्थना है मानो भक्त कह रहा हो कि तुम्हारे आने से हर विघ्न ख़त्म हो जाता है। “कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची” वाली पंक्ति गणपती के गले में मोतियों की माला का जो चित्र खींचती है, वो सुनने वाले को सीधे मूर्ति के सामने खड़ा कर देती है। इसी में आरती की ताक़त है शब्द सिर्फ स्तुति नहीं, बल्कि दृश्य रचते हैं।

    दूसरा कड़वा — शृंगार और भक्ति का मेल

    रत्नजड़ित मुकुट, चंदन और कुमकुम का श्रृंगार, पैरों की घुँघरू की आवाज़ यह कड़वा गणपती के रूप-सौंदर्य का वर्णन करता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह वर्णन सिर्फ बाहरी सुंदरता के लिए नहीं है, बल्कि भक्त के मन में एक भव्य, दिव्य छवि बिठाने के लिए है, ताकि आगे आने वाली प्रार्थना और गहरी लगे।

    तीसरा कड़वा — समर्पण और शरणागति

    “संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे” यही वो पंक्ति है जो पूरी आरती का सार है। भक्त कह रहा है: संकट में तुम ही सहारा हो, अंत समय में भी तुम ही रक्षक हो। “दास रामाचा वाट पाहे सदना” में समर्थ रामदास स्वयं को “राम का दास” कहते हुए गणपती के दर्शन की प्रतीक्षा में खड़े दिखाई देते हैं यह पंक्ति रचयिता की व्यक्तिगत भक्ति को सीधे आरती में पिरो देती है।

    इसी वजह से यह आरती सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं रह जाती। यह भक्ति, समर्पण और भावनात्मक सुरक्षा तीनों को एक साथ जोड़ती है, और शायद यही कारण है कि सैकड़ों साल बाद भी इसकी लोकप्रियता कम नहीं हुई।

    Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics — संगीत रचना और गायकी

    Anjali Jain की गायकी में इस आरती की सबसे बड़ी खूबी है उसका संयम न ओवर-ड्रामैटिक, न फ्लैट। पारंपरिक आरतियों में अक्सर ऊँचे सुर पर जल्दी पहुँचने की जल्दबाज़ी दिखती है, लेकिन इस रिकॉर्डिंग में हर कड़वे के बीच साँस लेने जितनी जगह छोड़ी गई है, जिससे सुनने वाला मंत्रोच्चार जैसी लय में डूब पाता है।

    किशोर मल्होत्रा की संगीत रचना में तबला और हारमोनियम की परंपरागत जोड़ी को प्रमुखता दी गई है, बिना किसी भारी ऑर्केस्ट्रेशन के यह जान-बूझकर लिया गया फ़ैसला लगता है, क्योंकि आरती का मूल स्वभाव घरेलू पूजा से जुड़ा है, कॉन्सर्ट-स्टाइल प्रस्तुति से नहीं। “जय देव जय देव” वाला ध्रुव-पद हर कड़वे के बाद दोहराया जाता है, जो सुनने वाले को साथ गाने के लिए स्वाभाविक रूप से आमंत्रित करता है यही वजह है कि यह वर्जन घरों और सामूहिक आरती दोनों जगह उतना ही सहज लगता है।

    एक बात जो अक्सर अनदेखी होती है: बहुत सारे modern अरेंजमेंट्स में आरती की गति (tempo) फिल्मी गानों जैसी तेज़ कर दी जाती है, ताकि यह “कैची” लगे। अंजली जैन के इस वर्ज़न में गति परंपरागत मध्यम लय के करीब रखी गई है जो भक्तिभाव के लिए ज़्यादा उपयुक्त मानी जाती है, भले ही यह स्ट्रीमिंग एल्गोरिद्म के लिहाज़ से “ट्रेंडी” कम लगे।

    तुलना: पारंपरिक आरती बनाम आधुनिक रिकॉर्डेड वर्जन

    पहलू घर/मंदिर में गाई गई पारंपरिक आरती Anjali Jain की रिकॉर्डेड आरती
    गति (Tempo) व्यक्ति/समूह अनुसार बदलती रहती है स्थिर, मध्यम लय में सुसंगत
    वाद्य अक्सर सिर्फ घंटी और ताली तबला-हारमोनियम आधारित संगीत रचना
    उच्चारण शुद्धता क्षेत्रीय बोलचाल के अनुसार अंतर संभव मूल मराठी उच्चारण के करीब
    उपयोगिता लाइव पूजा के लिए आदर्श स्ट्रीमिंग, यात्रा या पूजा-रिकॉर्डिंग दोनों के लिए सुविधाजनक
    भावनात्मक अनुभव सामूहिक भागीदारी की गर्माहट एकाग्रचित्त सुनने का अनुभव

    दोनों वर्ज़न अपनी जगह सही हैं सामूहिक आरती में भागीदारी का आनंद अलग है, जबकि रिकॉर्डेड वर्ज़न रोज़ की पूजा या यात्रा के दौरान सुनने के लिए ज़्यादा व्यावहारिक है।

    शब्दों का आध्यात्मिक प्रभाव

    इस आरती में जो शब्द उपयोग हुए हैं, वे केवल कविता नहीं हैं, वे मंत्र की तरह काम करते हैं:

    शब्द अर्थ आध्यात्मिक महत्त्व
    सुखकर्ता सुख देने वाला मांगलिक कार्यों में सबसे पहले स्मरण
    दुखहर्ता दुख हरने वाला जीवन की बाधाओं से मुक्ति का प्रतीक
    विघ्नाची वार्ता बाधाओं का नाश करने वाला गणेश जी विघ्नहर्ता के रूप में पूजे जाते हैं
    मंगलमूर्ती शुभता की प्रतिमा हर शुभ कार्य में आगे
    दर्शनमात्रे केवल दर्शन से ही दर्शन की महिमा को दर्शाता है
    कामनापूर्ती मनोकामना की पूर्ति भक्त की इच्छाओं की पूर्ति
    लम्बोदर बड़े पेट वाले ब्रह्मांड को धारण करने का प्रतीक
    वक्रतुंड घुमावदार सूंड वाले बाधाओं को मोड़ देने की शक्ति
    अष्ट सिद्धि आठ दिव्य शक्तियाँ गणेश जी की असीमित शक्ति का प्रतीक

    Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta – विशेष विश्लेषण

    यह आरती केवल गणेश जी की स्तुति नहीं है। इसके अंत में जो श्लोक जुड़े हैं, जैसे “हरे राम हरे कृष्ण” और “अच्युतम केशवम,” वे बताते हैं कि हिंदू भक्ति परंपरा किसी एक देवता तक सीमित नहीं है। गणेश पूजा से शुरू होकर विष्णु-राम-कृष्ण के स्मरण तक, यह आरती पूरे हिंदू दर्शन का एक संक्षिप्त संस्करण है।

    Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta च्या गाण्याचे बोल (मराठी में) सुनने वाले जानते हैं कि यह आरती गणेशोत्सव के दौरान महाराष्ट्र में हर घर में गाई जाती है। वहाँ यह केवल एक गाना नहीं, एक परंपरा है।

    Read Also: Teri Mand Mand Muskaniya Pe Lyrics

    निष्कर्ष (conclusion)

    Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics पर गहराई से नज़र डालें तो साफ़ दिखता है कि यह आरती महज़ पूजा की रस्म नहीं, बल्कि सत्रहवीं सदी से चली आ रही एक भावनात्मक विरासत है। समर्थ रामदास स्वामी के शब्दों में जो समर्पण और भरोसा है, वही किशोर मल्होत्रा की सादी संगीत रचना और अंजली जैन की बिना दिखावे वाली गायकी में पूरी तरह ज़िंदा हो उठता है।

    इस आरती की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि इसे गाने के लिए गहरे मराठी या संस्कृत ज्ञान की ज़रूरत नहीं। हिंदी अर्थ और आसान उच्चारण के साथ कोई भी भक्त इसे श्रद्धा से गा सकता है। “संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे” जैसी पंक्ति सदियों बाद भी सामयिक लगती है, क्योंकि संकट और सुरक्षा की चाहत कभी पुरानी नहीं पड़ती।

    चाहे गणेश चतुर्थी हो, रोज़ की संध्या आरती हो या बस मन शांत करने का समय ये बोल हर बार वही भरोसा, सुकून और जुड़ाव लौटा देते हैं।

    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

    Sukh Karta Dukh Harta आरती किसने लिखी है?

    इस आरती की रचना संत-कवि समर्थ रामदास स्वामी (1608–1682) ने की थी। यह गणपती को समर्पित सबसे प्रसिद्ध मराठी आरतियों में से एक मानी जाती है।

    Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics किस भाषा में हैं?

    मूल बोल मराठी भाषा में हैं। इस आरती के साथ हिंदी लिपि में पाठ और अंग्रेज़ी ट्रांसलिटरेशन दोनों उपलब्ध हैं, ताकि हर भाषा-भाषी भक्त इसे आसानी से पढ़ और गा सके।

    यह आरती किस अवसर पर गाई जाती है?

    गणेश चतुर्थी, गणेशोत्सव के दौरान, और साथ ही किसी भी नित्य पूजा या शुभ कार्य की शुरुआत में यह आरती गाई जाती है। परंपरा अनुसार, यह पूजा के अंत में गाई जाने वाली आरतियों में सबसे पहले गाई जाती है।

    “संकटी पावावे” का सही अर्थ क्या है, “संकष्टी” नहीं?

    “संकटी पावावे” का अर्थ है “संकट के समय में सहायता करना/रक्षा करना”। इसे “संकष्टी” (जो एक चतुर्थी तिथि का नाम है) कह देना आम भूल है, लेकिन शुद्ध पाठ में “संकटी” ही सही शब्द है।

    क्या यह आरती किसी फ़िल्म का हिस्सा है?

    नहीं। यह किसी फ़िल्म या फ़िल्मी एल्बम का हिस्सा नहीं है। Anjali Jain का यह वर्ज़न एक स्वतंत्र भक्ति सिंगल के रूप में 2017 में रिलीज़ हुआ था।

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    Ajay

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