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    Home - Devotional - Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics – दिल छू लेने वाली नात का पूरा हिंदी कलाम
    Devotional

    Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics – दिल छू लेने वाली नात का पूरा हिंदी कलाम

    AjayBy AjayAugust 17, 2026
    Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics – दिल छू लेने वाली नात का पूरा हिंदी कलाम

    Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics पढ़ते ही समझ आ जाता है कि यह कोई मामूली कलाम नहीं, बल्कि इश्क़-ए-रसूल में डूबा हुआ एक ऐसा शेर-दर-शेर सफ़र है जिसमें दर्द भी है, तड़प भी और आख़िर में एक अजीब सा सुकून भी। यह कलाम आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी की उन नात-शरीफ़ों में से है जिन्हें बरसों से सुनने और गुनगुनाने वाले लोग कम नहीं होते। इस लेख में पूरी लिरिक्स हिंदी में, रोमन उर्दू (Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics In English) में और साथ ही हर बंद के पीछे छुपे भाव को सीधी-सादी भाषा में समझाया गया है।

    Table of Contents

    Toggle
    • Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics से पहले — शायर और नात-ख़्वाँ की पूरी जानकारी
    • Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics Hindi
    • Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics In English
    • Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics का मतलब — शेर-दर-शेर भाव
    • Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics की तरन्नुम — संगीत और गायन का अंदाज़
    • Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics पर गहरी नज़र — जो अक्सर लेख छोड़ देते हैं
    • hir Ke Gali Gali Tabah Lyrics पढ़ने से पहले — अच्छी और सावधानी वाली बातें
    • निष्कर्ष: Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics
    • ? अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
      • 1. Phir Ke Gali Gali Tabah किस ने लिखी है?
      • 2. Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics Hindi में कहाँ मिलेंगी?
      • 3. क्या यह कलाम किसी फ़िल्म का हिस्सा है?
      • 4. इस नात की सबसे मशहूर पंक्ति कौन सी है?
      • 5. Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics In English कैसे पढ़ें अगर उर्दू लिपि नहीं आती?

    Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics से पहले — शायर और नात-ख़्वाँ की पूरी जानकारी

    इससे पहले कि हम Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics का पूरा कलाम पढ़ें, यह जानना ज़रूरी है कि इसे किसने लिखा और किन आवाज़ों में यह मशहूर हुआ। नीचे दी गई टेबल में शायर, नात-ख़्वाँ, विधा और मूल स्रोत की पूरी जानकारी एक जगह मिल जाएगी, ताकि कलाम पढ़ते वक़्त उसका पूरा संदर्भ (context) साफ़ रहे।

    विवरण जानकारी
    कलाम का नाम Phir Ke Gali Gali Tabah Thokren Sab Ki Khae Kyun
    शायर (Lyricist) इमाम अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी
    नात-ख़्वाँ (गायक) ओवैस रज़ा क़ादरी, ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरी, साबिर रज़ा अज़हरी सुरत
    संगीत/धुन पारंपरिक नात-ख़्वानी शैली (कोई फ़िल्मी संगीतकार नहीं)
    एल्बम/फ़िल्म कोई फ़िल्म या कमर्शियल एल्बम नहीं – यह एक क्लासिकल दीवान-ए-रज़ा का कलाम है
    भाषा उर्दू (हिंदी लिपि और रोमन उर्दू दोनों में उपलब्ध)
    विधा (Genre) नात, इश्क़-ए-रसूल, सूफ़ियाना कलाम
    मूल स्रोत naat-hindi.com पर मौजूद वेरिफाइड कलाम

    Disclaimer: यहाँ दी गई Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics इमाम अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी की मूल रचना है और सदियों पुरानी क्लासिकल उर्दू शायरी (दीवान-ए-रज़ा) का हिस्सा है। यहाँ दी गई लिरिक्स सिर्फ़ पढ़ने, समझने और तालीमी मक़सद के लिए साझा की गई हैं। इस कलाम को ओवैस रज़ा क़ादरी, ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरी और साबिर रज़ा अज़हरी सुरत जैसे नात-ख़्वाँों की आवाज़ में सुनने के लिए YouTube, JioSaavn या संबंधित नात एल्बम को सपोर्ट करें।

    एक बात साफ़ कर देनी ज़रूरी है यह कोई बॉलीवुड गाना नहीं है, इसलिए इसमें फ़िल्मी संगीतकार या साउंडट्रैक एल्बम जैसी कोई बात लागू नहीं होती। यह एक क्लासिकल उर्दू नात है, जिसे अलग-अलग दौर के नात-ख़्वाँ अपने अंदाज़ में तरन्नुम के साथ पढ़ते आए हैं। यही वजह है कि इसकी धुन हर बार सुनने वाले को थोड़ी अलग मगर उतनी ही असरदार लगती है।

    Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics Hindi

    फिर के गली गली तबाह ठोकरें सब की खाए क्यूँ
    दिल को जो अक्ल दे खुदा, तेरी गली से जाए क्यूँ

    रुख़्सत-ए-क़ाफ़िला का शोर ग़श से हमें उठाए क्यूँ
    सोते हैं उनके साये में कोई हमें जगाए क्यूँ

    बार न थे हबीब को, पालते ही ग़रीब को
    रोएँ जो अब नसीब को, चैन कहो गँवाए क्यूँ

    याद-ए-हुज़ूर की क़सम, ग़फ़लत-ए-ऐश है सितम
    खूब हैं क़ैद-ए-ग़म में हम, कोई हमें छुड़ाए क्यूँ

    देख के हज़रत-ए-ग़नी फैल पड़े फ़क़ीर भी
    छाई है अब तो छाउनी, हश्र ही आ न जाए क्यूँ

    जान है इश्क़-ए-मुस्तफ़ा, रोज़ फ़ुज़ूँ करे खुदा
    जिस को हो दर्द का मज़ा, नाज़-ए-दवा उठाए क्यूँ

    हम तो हैं आप दिल-फ़िगार ग़म में हँसी है ना-गवार
    छेड़ के गुल को नौ-बहार ख़ून हमें रुलाए क्यूँ

    या तो यूँही तड़प के जाएँ या वही दाम से छुड़ाएँ
    मिन्नत-ए-ग़ैर क्यूँ उठाएँ, कोई तरस जताए क्यूँ

    उन के जलाल का असर दिल से लगाए है क़मर
    जो कि हो लोट ज़ख़्म पर दाग़-ए-जिगर मिटाए क्यूँ

    ख़ुश रहे गुल से अंदलीब, ख़ार-ए-हरम मुझे नसीब
    मेरी बला भी ज़िक्र पर फूल के ख़ार खाए क्यूँ

    गर्द-ए-मलाल अगर धुले, दिल की कली अगर खिले
    बर्क़ से आँख क्यूँ जले, रोने पे मुस्कुराए क्यूँ

    जान-ए-सफ़र नसीब को, किस ने कहा मज़े से सो
    खटका अगर सहर का हो, शाम से मौत आए क्यूँ

    अब तो न रोक, ऐ ग़नी! आदत-ए-सग बिगड़ गई
    मेरे करीम पहले ही लुक़्मा-ए-तर खिलाए क्यूँ

    राह-ए-नबी में क्या कमी, फ़र्श-ए-बयाज़ दीदा की
    चादर-ए-ज़िल है मलगजी, ज़ेर-ए-क़दम बिछाए क्यूँ

    संग-ए-दर-ए-हुज़ूर से, हम को खुदा न सब्र दे
    जाना है सर को जा चुके, दिल को क़रार आए क्यूँ

    है तो, रज़ा! निरा सितम, जुर्म पे गर लजाएँ हम
    कोई बजाए सोज़-ए-ग़म, साज़-ए-तरब बजाए क्यूँ

    Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics In English

    Phir ke gali gali tabah thokrein sab ki khaye kyun
    Dil ko jo aql de Khuda, teri gali se jaye kyun

    Rukhsat-e-qafila ka shor ghash se humein uthaye kyun
    Sote hain un ke saaye mein koi humein jagaye kyun

    Baar na the Habib ko, paalte hi ghareeb ko
    Royein jo ab naseeb ko, chain kaho ganwaye kyun

    Yaad-e-Huzoor ki qasam, ghaflat-e-aish hai sitam
    Khoob hain qaid-e-gham mein hum, koi humein chhuraaye kyun

    Dekh ke Hazrat-e-Ghani phail pade faqeer bhi
    Chhayi hai ab to chhaoni, hashr hi aa na jaye kyun

    Jaan hai ishq-e-Mustafa, roz fazoon kare Khuda
    Jis ko ho dard ka maza, naaz-e-dawa uthaye kyun

    Hum to hain aap dil-figaar, gham mein hansi hai na-gawaar
    Chhed ke gul ko nau-bahaar, khoon humein rulaaye kyun

    Ya to yunhi tadap ke jayein ya wohi daam se chhuraayein
    Minnat-e-ghair kyun uthayein, koi taras jataaye kyun

    Un ke jalaal ka asar dil se lagaye hai qamar
    Jo ki ho lot zakhm par, daagh-e-jigar mitaye kyun

    Khush rahe gul se andaleeb, khaar-e-haram mujhe naseeb
    Meri bala bhi zikr par phool ke khaar khaye kyun

    Gard-e-malaal agar dhule, dil ki kali agar khile
    Barq se aankh kyun jale, rone pe muskuraye kyun

    Jaan-e-safar naseeb ko, kis ne kaha maze se so
    Khatka agar sahar ka ho, shaam se maut aaye kyun

    Ab to na rok, ae Ghani! aadat-e-sag bigad gayi
    Mere Kareem pehle hi luqma-e-tar khilaye kyun

    Raah-e-Nabi mein kya kami, farsh-e-bayaz-e-deeda ki
    Chaadar-e-zill hai malgaji, zer-e-qadam bichhaye kyun

    Sang-e-dar-e-Huzoor se, hum ko Khuda na sabr de
    Jaana hai sar ko ja chuke, dil ko qaraar aaye kyun

    Hai to Raza! nira sitam, jurm pe gar lajaayein hum
    Koi bajaye soz-e-gham, saaz-e-tarab bajaye kyun

    Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics का मतलब — शेर-दर-शेर भाव

    Phir Ke Gali Gali Tabah की पहली ही पंक्ति में एक आशिक़ की बेचैनी झलकती है गली-गली भटकना, ठोकरें खाना, फिर भी उसी दर की तरफ़ लौट आना। यही तड़प पूरे कलाम की जान है, और यही वजह है कि Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics को सिर्फ़ पढ़ना काफ़ी नहीं, बल्कि हर शेर के पीछे के जज़्बे को समझना ज़्यादा ज़रूरी है।

    • शुरुआती बंद में शायर सवाल करता है कि दिल को अगर अक़्ल मिल भी जाए तो वह मेहबूब की गली छोड़ने को राज़ी क्यों हो। यह इश्क़ की उस सच्चाई को दिखाता है जहाँ मंतिक़ काम नहीं करती, सिर्फ़ लगाव काम करता है।
    • “क़ैद-ए-ग़म” और “छाई है छाउनी” जैसे लफ़्ज़ ग़म को भी एक नेमत की तरह पेश करते हैं यहाँ दर्द से भागना नहीं, दर्द को गले लगाना सिखाया गया है।
    • “जान है ‘इश्क़-ए-मुस्त़फ़ा” वाला शेर पूरे कलाम का मरकज़ी ख़याल है यहाँ इश्क़ ही ज़िंदगी की असली वजह बताया गया है, और दर्द को दवा से बेहतर बताया गया है।
    • आख़िरी बंद में शायर अपना तख़ल्लुस “रज़ा” इस्तेमाल करते हुए एक गहरी बात कहते हैं ग़म का साज़ बजाना ज़्यादा ईमानदार लगता है बजाय जुर्म पर शर्मिंदा होने के, यानी सच्चा इश्क़ छुपाया नहीं जा सकता।

    यह कलाम पूरी तरह रूहानियत (spirituality) और इश्क़-ए-रसूल पर केंद्रित है। यहाँ न रोमांटिक प्रेम है, न देशभक्ति बल्कि एक ऐसा जज़्बा है जो सूफ़ी शायरी की पहचान रहा है: तड़प, सब्र, और आख़िर में सुकून। हर शेर की बहर (मीटर) इतनी संतुलित है कि जब इसे तरन्नुम में पढ़ा जाता है, तो सुनने वाले पर एक अलग ही असर होता है यही वजह है कि यह कलाम सालों बाद भी उतनी ही शिद्दत से पढ़ा और सुना जाता है।

    Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics की तरन्नुम — संगीत और गायन का अंदाज़

    चूँकि यह कलाम किसी फ़िल्मी साउंडट्रैक का हिस्सा नहीं है, इसलिए इसमें आधुनिक इंस्ट्रूमेंटेशन या स्टूडियो प्रोडक्शन जैसी बात लागू नहीं होती। Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics की असली ताक़त तरन्नुम (मेलोडिक रिसाइटेशन) में है, न कि किसी साज़ या बीट में।

    • ओवैस रज़ा क़ादरी की आवाज़ में यह कलाम धीमी शुरुआत से उठकर एक भावुक चरम तक पहुँचता है, जिसमें हर मिसरा साफ़ और ठहराव के साथ अदा किया जाता है।
    • ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरी का अंदाज़ थोड़ा पारंपरिक क़व्वाली की छुअन लिए हुए है, जिसमें दोहराव (repetition) के ज़रिए भाव को और गहरा किया जाता है।
    • साबिर रज़ा अज़हरी सुरत की रिसाइटेशन में बहर की पाबंदी साफ़ महसूस होती है, जो इस कलाम की क्लासिकल बनावट को उभारती है।

    अगर आप ग़ौर करें तो हर नात-ख़्वाँ इसी एक कलाम को अलग-अलग तरन्नुम में पढ़ता है, फिर भी मतलब और असर एक जैसा ही रहता है यही क्लासिकल उर्दू नात की सबसे बड़ी ख़ासियत है।

    Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics पर गहरी नज़र — जो अक्सर लेख छोड़ देते हैं

    ज़्यादातर वेबसाइटें Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics सिर्फ़ कॉपी-पेस्ट कर देती हैं, मगर कुछ बातें ग़ौर करने लायक हैं जो इस कलाम को सही तरह से समझने के लिए ज़रूरी हैं:

    1. बहर और रदीफ़-क़ाफ़िया: इस कलाम की रदीफ़ “क्यूँ” है, जो हर शेर में एक सवाल की शक्ल में दोहराई जाती है। यह तकनीक शायरी में “तज़ाद” (rhetorical questioning) कहलाती है, और यही इस नात को इतना असरदार बनाती है शायर जवाब नहीं माँगता, बल्कि सवाल के ज़रिए अपनी बेबसी और मोहब्बत दोनों बयान करता है।
    2. कठिन अल्फ़ाज़ का इस्तेमाल: “ग़फ़्लत-ए-‘ऐ़श”, “दाग़-ए-जिगर”, “गर्द-ए-मलाल” जैसे लफ़्ज़ आम बोलचाल में नहीं मिलते। नए पाठक अक्सर इन्हें ग़लत पढ़ लेते हैं इसलिए रोमन उर्दू ट्रांसलिटरेशन साथ में देना ज़रूरी है, ताकि उच्चारण (pronunciation) सही रहे।
    3. आम ग़लती: कई वेबसाइटों पर इस कलाम के शेर उलट-पुलट क्रम में मिलते हैं, या एक-दो मिसरे छूट जाते हैं। कलाम पढ़ते वक़्त हमेशा वेरिफाइड सोर्स से मिलान कर लेना चाहिए, वरना बहर टूट जाती है और तरन्नुम में पढ़ना मुश्किल हो जाता है।
    4. ऑडियो बनाम टेक्स्ट: अगर आप यह कलाम पहली बार पढ़ रहे हैं, तो सिर्फ़ लिखा हुआ पढ़ने से पूरा असर नहीं मिलेगा तरन्नुम में सुनना ज़्यादा फ़ायदेमंद रहेगा, क्योंकि बहर की पाबंदी सुनकर ही ठीक से समझ आती है।

    hir Ke Gali Gali Tabah Lyrics पढ़ने से पहले — अच्छी और सावधानी वाली बातें

    Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics पढ़ने या तरन्नुम में सीखने से पहले नीचे दी गई बातें ध्यान में रखना फ़ायदेमंद रहेगा, ख़ासकर उन पाठकों के लिए जो पहली बार क्लासिकल उर्दू नात पढ़ रहे हैं।

    पक्ष विवरण
    भावनात्मक गहराई हर शेर में इश्क़-ए-रसूल का गहरा जज़्बा, जो रूहानी सुकून देता है
    भाषा की पेचीदगी पुरानी उर्दू के भारी अल्फ़ाज़ नए पाठकों के लिए शुरुआत में मुश्किल हो सकते हैं
    पढ़ने का सही तरीक़ा बहर और रदीफ़ के हिसाब से पढ़ने पर ही असली लय महसूस होती है
    मूल स्रोत की पुष्टि हमेशा वेरिफाइड नात वेबसाइट या दीवान-ए-रज़ा से मिलान करना बेहतर, ताकि कोई शेर छूटे नहीं

    Read Also: Naam Hai Tera Taran Hara Lyrics

    निष्कर्ष: Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics

    Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics सिर्फ़ कुछ पंक्तियाँ नहीं हैं यह इश्क़-ए-रसूल की उस तड़प का बयान है जो हर दौर में उतनी ही शिद्दत से महसूस की जाती रही है। रदीफ़ “क्यूँ” के सहारे शायर ने सवाल के परदे में जो जवाब छुपाया है, वह हर पढ़ने वाले को अपने-अपने तरीक़े से मिलता है किसी को सब्र में, किसी को तड़प में, और किसी को उसी दर पर लौट आने में।

    अगर आप पहली बार यह कलाम पढ़ रहे हैं, तो सिर्फ़ लिखे हुए लफ़्ज़ों तक न रुकें इसे किसी नात-ख़्वाँ की आवाज़ में तरन्नुम के साथ सुनें, तभी बहर और रदीफ़-क़ाफ़िया का असली मज़ा समझ आएगा। हिंदी और रोमन उर्दू दोनों लिपियों में पूरा कलाम ऊपर मौजूद है, ताकि लिपि की वजह से कोई पाठक इस कलाम से महरूम न रहे।

    Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics की सबसे बड़ी ख़ूबी यही है कि यह किसी ट्रेंड या फ़िल्मी रिलीज़ का मोहताज नहीं यह एक ऐसा क्लासिकल कलाम है जो सदियों बाद भी उतना ही ताज़ा और असरदार लगता है। इसे पढ़ें, गुनगुनाएँ, और अगर मुमकिन हो तो असली नात-ख़्वाँों की आवाज़ में सुनकर इसका पूरा सुकून महसूस करें।

    ? अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

    1. Phir Ke Gali Gali Tabah किस ने लिखी है?

    यह कलाम इमाम अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी (आला हज़रत) की रचना है, जो उर्दू और फ़ारसी के मशहूर शायर और इस्लामी विद्वान रहे हैं।

    2. Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics Hindi में कहाँ मिलेंगी?

    इस लेख में पूरा कलाम हिंदी लिपि में ऊपर “Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics Hindi” सेक्शन में दिया गया है, शेर-दर-शेर सही क्रम में।

    3. क्या यह कलाम किसी फ़िल्म का हिस्सा है?

    नहीं। यह एक क्लासिकल नात है, किसी बॉलीवुड फ़िल्म या कमर्शियल एल्बम का हिस्सा नहीं है। इसे अलग-अलग नात-ख़्वाँ अपनी महफ़िलों और रिकॉर्डिंग में पढ़ते हैं।

    4. इस नात की सबसे मशहूर पंक्ति कौन सी है?

    “जान है ‘इश्क़-ए-मुस्त़फ़ा, रोज़ फ़ुज़ूँ करे ख़ुदा” वाला शेर सबसे ज़्यादा दोहराया और पसंद किया जाता है, क्योंकि यह कलाम का मरकज़ी ख़याल बयान करता है।

    5. Phir Ke Gali Gali Tabah Lyrics In English कैसे पढ़ें अगर उर्दू लिपि नहीं आती?

    ऊपर दिए गए रोमन उर्दू ट्रांसलिटरेशन सेक्शन से पढ़ें हर लफ़्ज़ की स्पेलिंग असली उच्चारण के क़रीब रखी गई है (जैसे “KH” के लिए ख़, “G” के लिए ग़)।

    Read More Lyrics Here :- My Vibe Lyrics

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