“Kabhi Fursat Ho To Jagdambe” यह भजन सोनू निगम की आवाज़ में, संगीतकार अरुण पौडवाल की धुन पर, गीतकार बलबीर निर्दोष द्वारा लिखा गया एक ऐसा दुर्गा भजन है जो एक ग़रीब भक्त की सच्ची श्रद्धा को माँ जगदम्बे के सामने रखता है। इस भजन में न सोने का छत्र है, न मेवा-मिठाई सिर्फ एक निर्धन का प्रेम और विनम्र निवेदन है कि “निर्धन के घर भी आ जाना।”
एक भजन जो सीधे दिल तक पहुँचता है
अगर आप Kabhi Fursat Ho To Jagdambe Lyrics की तलाश में यहाँ आए हैं, तो आप सिर्फ शब्द नहीं ढूँढ रहे आप उस भावना को महसूस करना चाहते हैं जो इस भजन में बसी है।
यह भजन किसी अमीर भक्त की भव्य आरती नहीं है। यह उस इंसान की आवाज़ है जिसके घर में दिए के लिए तेल नहीं, चौकी सजाने की हैसियत नहीं, लेकिन माँ से मिलने की ललक उतनी ही गहरी है जितनी किसी भी भक्त की हो सकती है।
“Kabhi Fursat Ho To Jagdambe, Nirdhan Ke Ghar Bhi Aa Jana” यह पंक्ति सुनते ही रोंगटे क्यों खड़े हो जाते हैं? क्योंकि यह सिर्फ एक गीत नहीं, यह करोड़ों साधारण भक्तों की असाधारण प्रार्थना है।
Disclaimer: ये lyrics मूल कलाकारों – Sonu Nigam (गायक), Arun Paudwal (संगीतकार), Balbir Nirdosh (गीतकार) और T-Series के हैं। ये lyrics केवल भक्ति-प्रेम, सराहना और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए यहाँ प्रस्तुत किए गए हैं।
Overview: गाने और उसके रचनाकारों के बारे में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| भजन का नाम | कभी फुर्सत हो तो जगदम्बे (Kabhi Fursat Ho To Jagdambe) |
| गायक (Singer) | सोनू निगम (Sonu Nigam) |
| संगीतकार (Composer) | अरुण पौडवाल (Arun Paudwal) |
| गीतकार (Lyricist) | बलबीर निर्दोष (Balbir Nirdosh) |
| Album | Main Balak Tu Mata (Vol. 2) / Jai Mata Di Boliye |
| रिलीज़ वर्ष | 1997 |
| Label | T-Series |
| भजन की तर्ज़ | बाबुल की दुआयें लेती जा |
| अवधि (Duration) | 4:05 मिनट |
| श्रेणी (Genre) | दुर्गा भजन / भक्ति संगीत |
| देवी | माँ जगदम्बे (दुर्गा माँ) |
Kabhi Fursat Ho To Jagdambe Lyrics in Hindi
कभी फुर्सत हो तो जगदम्बे, निर्धन के घर भी आ जाना ।
जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना ॥
ना छत्र बना सका सोने का, ना चुनरी घर मेरे तारों जड़ी ।
ना पेड़े बर्फी मेवा है माँ, बस श्रद्धा है नैन बिछाए खड़े ॥
इस श्रद्धा की रख लो लाज हे माँ, इस विनती को ना ठुकरा जाना ।
जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना ॥
कभी फुर्सत हो तो जगदम्बे, निर्धन के घर भी आ जाना ।
जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना ॥
जिस घर के दिए में तेल नहीं, वहाँ ज्योत जलाऊँ मैं कैसे ।
मेरा खुद ही बिछौना धरती पर, तेरी चौकी सजाऊँ मैं कैसे ॥
जहाँ मैं बैठा वही बैठ के माँ, बच्चों का दिल बहला जाना ।
जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना ॥
कभी फुर्सत हो तो जगदम्बे, निर्धन के घर भी आ जाना ।
जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना ॥
तू भाग्य बनाने वाली है, माँ मैं तकदीर का मारा हूँ ।
हे दाती संभालो भिखारी को, आखिर तेरी आँख का तारा हूँ ॥
मैं दोषी तू निर्दोष है माँ, मेरे दोषों को तू भुला जाना ।
जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना ॥
कभी फुर्सत हो तो जगदम्बे, निर्धन के घर भी आ जाना ।
जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना ॥
Kabhi Fursat Ho To Jagdambe Lyrics in English (Transliteration)
Kabhi Fursat Ho To Jagdambe, Nirdhan Ke Ghar Bhi Aa Jana ।
Jo Rukha Sukha Diya Hamein, Kabhi Uska Bhog Laga Jana ॥
Na Chhatr Bana Saka Sone Ka, Na Chunri Ghar Mere Taaron Jadi ।
Na Pede Barfi Mewa Hai Maa, Bas Shraddha Hai Nain Bichhaye Khadi ॥
Is Shraddha Ki Rakh Lo Laaj He Maa, Is Vinti Ko Na Thukra Jana ।
Jo Rukha Sukha Diya Hamein, Kabhi Uska Bhog Laga Jana ॥
Kabhi Fursat Ho To Jagdambe, Nirdhan Ke Ghar Bhi Aa Jana ।
Jo Rukha Sukha Diya Hamein, Kabhi Uska Bhog Laga Jana ॥
Jis Ghar Ke Diye Mein Tel Nahin, Wahan Jyot Jalaoon Main Kaise ।
Mera Khud Hi Bichhona Dharti Par, Teri Chauki Sajaaun Main Kaise ॥
Jahan Main Baitha Wahi Baith Ke Maa, Bachchon Ka Dil Bahla Jana ।
Jo Rukha Sukha Diya Hamein, Kabhi Uska Bhog Laga Jana ॥
Kabhi Fursat Ho To Jagdambe, Nirdhan Ke Ghar Bhi Aa Jana ।
Jo Rukha Sukha Diya Hamein, Kabhi Uska Bhog Laga Jana ॥
Tu Bhagya Banane Wali Hai, Maa Main Takdeer Ka Maara Hoon ।
He Daati Sambhalo Bhikhari Ko, Aakhir Teri Aankh Ka Tara Hoon ॥
Main Doshi Tu Nirdosh Hai Maa, Mere Doshon Ko Tu Bhula Jana ।
Jo Rukha Sukha Diya Hamein, Kabhi Uska Bhog Laga Jana ॥
Kabhi Fursat Ho To Jagdambe, Nirdhan Ke Ghar Bhi Aa Jana ।
Jo Rukha Sukha Diya Hamein, Kabhi Uska Bhog Laga Jana ॥
भजन की गहराई – शब्दों में छुपी आत्मा
“Kabhi Fursat Ho To Jagdambe Nirdhan Ke Ghar Bhi Aa Jana” – यह एक line पूरे भजन की रूह है।
ध्यान दीजिए – भक्त माँ से कह रहा है “जब फुर्सत हो तो आना।” वो माँ पर दबाव नहीं डाल रहा, demand नहीं कर रहा। यह विनम्रता की उच्चतम अवस्था है। वो जानता है माँ के पास बड़े-बड़े दरबार हैं, सोने के मंदिर हैं – और इसीलिए कहता है “बस, जब फुर्सत मिले तभी।”
“ना छत्र बना सका सोने का” – यह line गरीबी का रोना नहीं है। यह एक honest confession है। भजन यह नहीं कह रहा कि मैंने कोशिश नहीं की, बल्कि कह रहा है कि मेरी ताकत यहाँ तक ही थी।
“जिस घर के दिए में तेल नहीं” – यह उस गरीबी की तस्वीर है जो सिर्फ पैसे की नहीं, उस गहरी बेबसी की है जहाँ इंसान अपने घर में माँ की पूजा तक नहीं कर सकता। लेकिन भक्त हार नहीं मानता – वो कहता है, “जहाँ मैं बैठा हूँ, वहीं आ जाओ।”
“मैं दोषी, तू निर्दोष है माँ” – यह भजन का सबसे powerful moment है। भक्त अपनी गलतियाँ स्वीकार करता है और माँ पर भरोसा जताता है। यही तो असली भक्ति है – बिना शर्त।
Musical Composition और Vocal Performance
अरुण पौडवाल की धुन – परिचित फिर भी नई
इस भजन की धुन “बाबुल की दुआयें लेती जा” पर आधारित है – एक ऐसी tarz जो पहले से ही भावुकता के साथ जुड़ी है। यह एक समझदार creative choice था। जब धुन पहले से ही emotions के साथ jodi हो, तो नए शब्द उस पर और गहरे बैठते हैं।
सोनू निगम का vocal rendering – तीन stages में
पहला अंतरा: आवाज़ में एक औपचारिकता है, जैसे कोई दरबार में entry कर रहा हो।
दूसरा अंतरा: यहाँ आकर आवाज़ थोड़ी टूटती है – “जिस घर के दिए में तेल नहीं” – सोनू यहाँ ज़्यादा personal हो जाते हैं।
तीसरा अंतरा: “मैं दोषी तू निर्दोष है माँ” – यह line सोनू निगम की vocal maturity का सबसे बड़ा प्रमाण है। यहाँ surrender है, acceptance है।
T-Series और 1997 का भक्ति संगीत
1990s में T-Series ने भारत में भक्ति संगीत को mass audience तक पहुँचाया। “Main Balak Tu Mata (Vol. 2)” उसी दौर की एक landmark release थी। Cassette culture के उस युग में यह भजन घर-घर पहुँचा।
यह भजन आज भी क्यों प्रासंगिक है?
भक्ति में दिखावे की होड़ बढ़ रही है। बड़े-बड़े भंडारे, महँगे decoration, social media पर पूजा की reels – इस सब के बीच “Kabhi Fursat Ho To Jagdambe” एक ज़रूरी याद दिलाता है कि माँ को सोने का छत्र नहीं, सच्चा मन चाहिए।
यह भजन उन करोड़ों लोगों की आवाज़ है जो नवरात्रि में मंदिर नहीं जा पाते, जो माँ को फूल नहीं चढ़ा पाते, जो बस घर में बैठकर हाथ जोड़ लेते हैं। उन सबको यह भजन कहता है – तुम्हारी श्रद्धा किसी छत्र से कम नहीं।
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निष्कर्ष – श्रद्धा किसी दौलत की मोहताज नहीं
“Kabhi Fursat Ho To Jagdambe” सिर्फ एक भजन नहीं है – यह उन सभी लोगों का आईना है जो माँ से प्यार तो करते हैं, पर अपनी गरीबी या बेबसी के कारण खुद को “कम योग्य” समझते हैं।
बलबीर निर्दोष ने जो शब्द लिखे, अरुण पौडवाल ने जो धुन बुनी, और सोनू निगम ने जो आवाज़ दी – तीनों ने मिलकर एक ऐसा भजन तैयार किया जो 1997 से आज तक फीका नहीं पड़ा। बल्कि जैसे-जैसे समय बीता, इसकी गहराई और बढ़ती गई।
Kabhi Fursat Ho To Jagdambe Nirdhan Ke Ghar Bhi Aa Jana – यह पंक्ति हमें याद दिलाती है कि भक्ति का रिश्ता सोने-चाँदी से नहीं, मन की सच्चाई से है। माँ जगदम्बे किसी बड़े मंदिर में ही नहीं, उस घर में भी होती हैं जहाँ बस एक दीया जलता है – और उसमें भी तेल पूरा नहीं।
जब भी नवरात्रि आए, जब भी मन भारी हो, जब भी लगे कि माँ दूर हैं – यह भजन एक बार ज़रूर सुनें। यह सुनाई नहीं देता, महसूस होता है।
? FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. “Kabhi Fursat Ho To Jagdambe” किसने गाया है?
यह भजन सोनू निगम ने गाया है। इसे T-Series के album “Main Balak Tu Mata (Vol. 2)” में 1997 में रिलीज़ किया गया था।
Q2. Kabhi Fursat Ho To Jagdambe के गीतकार कौन हैं?
इस भजन के lyrics बलबीर निर्दोष (Balbir Nirdosh) ने लिखे हैं।
Q3. “Kabhi Fursat Ho To Jagdambe Nirdhan Ke Ghar Bhi Aa Jana” का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है – “हे जगदम्बे माँ, जब भी तुम्हें समय मिले, इस गरीब के घर भी आ जाना।” यह एक विनम्र भक्त की प्रार्थना है जो माँ को बड़े आग्रह से, पर बिना किसी अहंकार के, अपने सरल घर बुला रहा है।
Q4. Kabhi Fursat Ho To Jagdambe Lyrics in Hindi कहाँ से पढ़ें?
इस भजन के पूरे Kabhi Fursat Ho To Jagdambe Lyrics in Hindi ऊपर दिए गए हैं, साथ ही English Transliteration और Translation भी उपलब्ध है।
Q5. Kabhi Fursat Ho To Jagdambe किस देवी को समर्पित है?
यह भजन माँ जगदम्बे (जो माँ दुर्गा का ही एक नाम है) को समर्पित है। यह दुर्गा भजन की श्रेणी में आता है।
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