Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics भगवान गणेश को समर्पित एक पारंपरिक मराठी आरती के बोल हैं। यह आरती “Ganesh Aarti” एल्बम में शामिल है जिसमें संगीत Samuel Paul ने दिया है। इसके बोल पारंपरिक हैं। नीचे आपको इस आरती की पूरी lyrics हिंदी में, English transliteration, और अर्थ सहित विश्लेषण मिलेगा।
Anjali Jain और “Sukh Karta Dukh Harta”
जब भी गणेश पूजा की बात आती है, तो एक आरती जो हर मंदिर, हर घर और हर उत्सव में गूंजती है, वह है “सुखकर्ता दुखहर्ता”। यह आरती सिर्फ एक भजन नहीं है, यह भगवान गणेश के प्रति असीम श्रद्धा और भक्ति का वह स्वर है जो पीढ़ियों से चला आ रहा है।
Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics की बात करें तो यह आरती उनकी आवाज़ में और भी ज़्यादा प्रभावशाली और दिल को छूने वाली बन जाती है। Anjali Jain की आवाज़ में एक ऐसी आध्यात्मिक गहराई है जो सुनने वाले को तुरंत भक्ति की एक अलग ही दुनिया में ले जाती है।
यह आरती मूल रूप से मराठी भाषा में है जो महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। लेकिन इसकी आत्मा इतनी सार्वभौमिक है कि हिंदी बेल्ट से लेकर दक्षिण भारत तक, हर जगह गणेश भक्त इसे उतनी ही श्रद्धा से गाते हैं।
Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta – गाने की पूरी जानकारी (Overview)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| Song Title | सुखकर्ता दुखहर्ता (Sukh Karta Dukh Harta) |
| Singer | Anjali Jain |
| Music | Samuel Paul |
| Lyrics | Traditional (पारंपरिक) |
| Album | Ganesh Aarti |
| Genre | Devotional / Aarti (भक्ति) |
| Label | Wings Entertainment Ltd |
| Language | मराठी / हिंदी |
| Release Year | 2005 |
| Duration | 57:24 minutes |
Disclaimer: ये lyrics Anjali Jain और Wings Entertainment Ltd के मूल कलाकारों की संपत्ति हैं। ये बोल केवल भक्ति, प्रशंसा और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए प्रस्तुत किए गए हैं। कृपया कलाकारों का समर्थन करें और इस आरती को JioSaavn, Spotify या YouTube पर सुनें।
Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics In Hindi – पूरी आरती
सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची।
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची॥
सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची।
कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची॥
जय देव, जय देव
【कोरस】
जय देव, जय देव जय देव, जय देव
जय मंगलमूर्ती, श्री मंगलमूर्ती
दर्शनमात्रे मन कामनापूर्ती
जय देव, जय देव
रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा
चंदनाची उटी कुमकुम केशरा
हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा
रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरिया
जय देव, जय देव
【कोरस】
जय देव, जय देव जय देव, जय देव
जय मंगलमूर्ती, श्री मंगलमूर्ती
दर्शनमात्रे मन कामनापूर्ती
जय देव, जय देव
लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना
सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना
दास रामाचा वाट पाहे सदना
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना
जय देव, जय देव
【कोरस】
जय देव, जय देव जय देव, जय देव
जय मंगलमूर्ती, श्री मंगलमूर्ती
दर्शनमात्रे मन कामनापूर्ती
जय देव, जय देव
शेंदुर लाल चढायो अच्छा गजमुख को
दोन्दिल लाल बिराजे सूत गौरिहर को
हाथ लिए गुड लड्डू साई सुरवर को
महिमा कहे ना जाय लागत हूँ पद को
जय देव, जय देव
【कोरस】
जय देव, जय देव जय देव, जय देव
जय मंगलमूर्ती, श्री मंगलमूर्ती
दर्शनमात्रे मन कामनापूर्ती
जय देव, जय देव
अष्ट सिधि दासी संकट को बैरी
विघन विनाशन मंगल मूरत अधिकारी
कोटि सूरज प्रकाश ऐसे छबी तेरी
गंडस्थल मद्मस्तक झूल शशि बहरी
जय देव, जय देव
【कोरस】
जय देव, जय देव जय देव, जय देव
जय मंगलमूर्ती, श्री मंगलमूर्ती
दर्शनमात्रे मन कामनापूर्ती
जय देव, जय देव
भावभगत से कोई शरणागत आवे
संतति संपत्ति सबही भरपूर पावे
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे
गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे
जय देव, जय देव
【कोरस】
जय देव, जय देव जय देव, जय देव
जय मंगलमूर्ती, श्री मंगलमूर्ती
दर्शनमात्रे मन कामनापूर्ती
जय देव, जय देव
— घालिन लोटांगण आरती —
घालिन लोटांगण, वंदिन चरण।
डोळ्यांनी पाहिन रूप तुझे।
प्रेमे आलिंगीन आनंदे पुजिन।
भावें ओवाळिन म्हणे नामा॥
त्वमेव माता च पिता त्वमेव,
त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव॥
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव,
त्वमेव सर्व मम देवदेव॥
कायेन वाचा मनसेंद्रियैर्वा,
बुध्दात्मना वा प्रकृतिस्वभावात्।
करोमि यद्यत् सकलं परस्मै
नारायणायेति समर्पयामि॥
अच्युतं केशवं रामनारायणं,
कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरि।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं,
जानकीनायकं रामचंद्रं भजे॥
हरे राम हरे राम,
राम राम हरे हरे।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण,
कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥
हरे राम हरे राम,
राम राम हरे हरे।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण,
कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥
Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics English – Transliteration
Sukh Karta Dukhharta Varta Vighnachi
Noorvi Poorvi Prem Krupya Jayachi
Sarwangi Sundar Uti Shendurachi
Kanthi Jhalke Maal Muktafalanchi
Jai Dev, Jai Dev
【Chorus】
Jai Dev Jai Dev, Jai Dev Jai Dev
Jai Mangalmurti, Shri Mangalmurti
Darshan Matre Mann Kamana Purti
Jai Dev, Jai Dev
Ratnakhachit Phara Tujh Gaurikumra
Chandanaachi Uti Kumkum Ke Shara
Hire Jadit Mukut Shobhato Bara
Runjhunati Nupure Charani Ghagriya
Jai Dev, Jai Dev
【Chorus】
Jai Dev Jai Dev, Jai Dev Jai Dev
Jai Mangalmurti, Shri Mangalmurti
Darshan Matre Mann Kamana Purti
Jai Dev, Jai Dev
Lambodar Pitaambar Phanivar Vandana
Saral Sond Vakratunda Trinayana
Das Ramacha Vat Pahe Sadna
Sankati Pavave Nirvani Rakshave Survar Vandana
Jai Dev, Jai Dev
【Chorus】
Jai Dev Jai Dev, Jai Dev Jai Dev
Jai Mangalmurti, Shri Mangalmurti
Darshan Matre Mann Kamana Purti
Jai Dev, Jai Dev
Shendur Lal Chadhayo Achha Gajmukh Ko
Dondil Lal Biraje Sut Gaurihar Ko
Haath Liye Gud Laddu Sai Survar Ko
Mahima Kahe Na Jaay Lagat Hoon Pad Ko
Jai Dev, Jai Dev
【Chorus】
Jai Dev Jai Dev, Jai Dev Jai Dev
Jai Mangalmurti, Shri Mangalmurti
Darshan Matre Mann Kamana Purti
Jai Dev, Jai Dev
Asht Sidhi Daasi Sankat Ko Bairi
Vighan Vinashan Mangal Murat Adhikari
Koti Suraj Prakash Aise Chabi Teri
Gandsthala Madmastak Jhul Shashi Bahari
Jai Dev, Jai Dev
【Chorus】
Jai Dev Jai Dev, Jai Dev Jai Dev
Jai Mangalmurti, Shri Mangalmurti
Darshan Matre Mann Kamana Purti
Jai Dev, Jai Dev
Bhavbhagat Se Koi Sharanagat Aave
Santati Sampati Sabhi Bharpoor Paave
Aise Tum Maharaj Moko Ati Bhaave
Gosavinandan Nishidin Gun Gaave
Jai Dev, Jai Dev
【Chorus】
Jai Dev Jai Dev, Jai Dev Jai Dev
Jai Mangalmurti, Shri Mangalmurti
Darshan Matre Mann Kamana Purti
Jai Dev, Jai Dev
— Ghalin Lotangan Aarti —
Ghalin Lotangan Vandin Charan
Dolyani Pahin Rup Tujhe
Preme Alingin Anande Pujin
Bhave Ovalin Mhane Naama
Twamev Mata Cha Pita Twamev
Twamev Bandhusch Sakha Twamev
Twamev Vidya Dravinam Twamev
Twamev Sarvam Mam Dev Dev
Kayena Vacha Manasendriyenva
Buddhayatmna Va Prakrutiswabhavat
Karomi Yadhyat Sakalam Parasmai
Narayanayeti Samarpayami
Achyutam Keshavam Ramnarayanam
Krishnadamodaram Vasudevam Hari
Shridharam Madhavam Gopikavallabham
Janakinayakam Ramchandra Bhaje
Hare Ram Hare Ram
Ram Ram Hare Hare
Hare Krishna Hare Krishna
Krishna Krishna Hare Hare
Hare Ram Hare Ram
Ram Ram Hare Hare
Hare Krishna Hare Krishna
Krishna Krishna Hare Hare
Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics English Translation – शब्दार्थ और अनुवाद
पहला श्लोक – मुख्य प्रार्थना
“सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची” He who creates happiness and removes sorrow, this is the story of the one who destroys all obstacles.
यह पहली पंक्ति ही पूरी आरती का सार है। “सुखकर्ता” का अर्थ है जो सुख देता है। “दुखहर्ता” का अर्थ है जो दुख हरता है। “विघ्नाची वार्ता” यानी बाधाओं की कहानी, जिसे गणेश जी नष्ट कर देते हैं।
“नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची” He who removes (our troubles) and fulfills (our wishes) whose love and grace are eternal.
“सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची” Beautiful in every limb, adorned with the paste of vermilion (sindoor).
“कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची” Around whose neck glimmers a garland of lustrous pearls.
कोरस का अर्थ
“जय मंगलमूर्ती, दर्शनमात्रे मन कामनापूर्ती” Victory to the auspicious form (Mangalmurti)! Merely by your sight (darshan), all desires of the heart are fulfilled.
यह पंक्ति भक्ति की सबसे गहरी अवधारणा को दर्शाती है। गणेश जी का दर्शन मात्र ही मनोकामना पूर्ण कर देता है।
दूसरा श्लोक – गणेश जी का अलंकरण
“रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा” O son of Gauri (Parvati), your headdress (phara) is studded with gems.
“चंदनाची उटी कुमकुम केशरा” Your body is anointed with sandalwood paste, kumkum and saffron.
“हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा” The diamond-studded crown upon your head looks magnificent.
“रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरिया” Tiny anklets on your feet tinkle melodiously.
तीसरा श्लोक – गणेश जी का स्वरूप वर्णन
“लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना” Salutations to the one with a large belly (Lambodar), wearing yellow garments (Pitambar), adorned with the king of serpents.
“सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना” With a graceful trunk, curved head, and three eyes.
“दास रामाचा वाट पाहे सदना” Ram’s servant awaits at the house (forever in devotion).
“संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना” Protect us in times of crisis, protect us at the moment of liberation, O lord praised by the gods.
चौथा श्लोक – सिंदूर की महिमा
“शेंदुर लाल चढायो अच्छा गजमुख को” Beautiful red vermilion is applied to the elephant-faced lord.
“हाथ लिए गुड लड्डू साई सुरवर को” In his hands he holds jaggery and laddoo, the lord of the gods.
“महिमा कहे ना जाय लागत हूँ पद को” His glory cannot be fully expressed in words; I bow at his feet.
पाँचवाँ श्लोक – अष्ट सिद्धियाँ
“अष्ट सिधि दासी संकट को बैरी” The eight Siddhis (supernatural powers) serve him as maids; he is the enemy of all troubles.
“कोटि सूरज प्रकाश ऐसे छबी तेरी” Your radiance is like the brilliance of crores of suns.
छठा श्लोक – भक्ति का फल
“भावभगत से कोई शरणागत आवे” Whoever comes to your shelter with sincere devotion and feeling…
“संतति संपत्ति सबही भरपूर पावे” …receives children, wealth and prosperity in abundance.
यह श्लोक भक्ति की शर्त को स्पष्ट करता है। “भावभगत से” यानी सच्चे भाव और भक्ति से। बिना भाव के पूजा केवल एक औपचारिकता है।
घालिन लोटांगण – साष्टांग प्रणाम
“घालिन लोटांगण, वंदिन चरण” I prostrate myself fully (do Sashtang Pranam) and bow at your feet.
“डोळ्यांनी पाहिन रूप तुझे” With my eyes I behold your divine form.
“भावें ओवाळिन म्हणे नामा” With devotion I wave the lamp of aarti, says Nama (the devotee).
त्वमेव माता – सर्वोच्च समर्पण
“त्वमेव माता च पिता त्वमेव” You alone are my mother and you alone are my father.
“त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव” You alone are my knowledge, you alone are my wealth.
“त्वमेव सर्व मम देवदेव” You are everything to me, O God of Gods.
यह श्लोक भक्त के पूर्ण समर्पण की पराकाष्ठा है। यहाँ भक्त कहता है कि उसके जीवन में जो भी है, माता-पिता, मित्र, विद्या, धन, सब कुछ ईश्वर ही है।
Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta च्या गाण्याचे बोल – संगीत और गायन विश्लेषण
Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta को जो चीज़ बाकी गायकों से अलग करती है, वह है उनकी आवाज़ की पवित्रता और भक्ति का भाव। जब Anjali Jain इस आरती को गाती हैं तो हर शब्द में एक अलग तरह की ऊर्जा होती है।
Samuel Paul ने इस आरती का संगीत इस तरह तैयार किया है कि यह पारंपरिक भाव को बनाए रखते हुए आधुनिक श्रोताओं तक भी पहुँच सके। तबला, ढोलक और झांझ की ताल पर जब Anjali Jain की आवाज़ “जय देव, जय देव” कहती है, तो वातावरण में एक अद्भुत कंपन होता है।
Wings Entertainment Ltd ने इस “Ganesh Aarti” एल्बम को 2005 में प्रकाशित किया। इस एल्बम की खासियत यह है कि इसमें 57 मिनट से अधिक की आरती एक साथ है, जो किसी भी गणेश पूजा के लिए पर्याप्त है।
शब्दों का आध्यात्मिक प्रभाव
इस आरती में जो शब्द उपयोग हुए हैं, वे केवल कविता नहीं हैं, वे मंत्र की तरह काम करते हैं:
| शब्द | अर्थ | आध्यात्मिक महत्त्व |
|---|---|---|
| सुखकर्ता | सुख देने वाला | मांगलिक कार्यों में सबसे पहले स्मरण |
| दुखहर्ता | दुख हरने वाला | जीवन की बाधाओं से मुक्ति का प्रतीक |
| विघ्नाची वार्ता | बाधाओं का नाश करने वाला | गणेश जी विघ्नहर्ता के रूप में पूजे जाते हैं |
| मंगलमूर्ती | शुभता की प्रतिमा | हर शुभ कार्य में आगे |
| दर्शनमात्रे | केवल दर्शन से ही | दर्शन की महिमा को दर्शाता है |
| कामनापूर्ती | मनोकामना की पूर्ति | भक्त की इच्छाओं की पूर्ति |
| लम्बोदर | बड़े पेट वाले | ब्रह्मांड को धारण करने का प्रतीक |
| वक्रतुंड | घुमावदार सूंड वाले | बाधाओं को मोड़ देने की शक्ति |
| अष्ट सिद्धि | आठ दिव्य शक्तियाँ | गणेश जी की असीमित शक्ति का प्रतीक |
Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta – आरती का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्त्व
Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics में जो आध्यात्मिकता है, वह कई स्तरों पर काम करती है।
पहला स्तर है भाषा का। यह आरती मूलतः मराठी में है। मराठी भाषा में एक ऐसी मिठास है जो भक्ति को और गहरा बना देती है। “घालिन लोटांगण” जैसे शब्द हिंदी में नहीं हैं, लेकिन उनका भाव इतना गहरा है कि हर भक्त, चाहे किसी भी भाषा का हो, उसे समझ सकता है।
दूसरा स्तर है दृश्य का। इस आरती में गणेश जी का जो वर्णन है, वह इतना विस्तृत और सजीव है कि आँखें बंद करके सुनने पर उनकी प्रतिमा मन में साकार हो जाती है। सिंदूर लगा हुआ गज-मुख, हीरे जड़ित मुकुट, मोतियों की माला, तरह-तरह के अलंकार। यह भक्ति की सिनेमेटिक दृष्टि है।
तीसरा स्तर है समर्पण का। “त्वमेव माता च पिता त्वमेव” से शुरू होकर “नारायणायेति समर्पयामि” तक, यह आरती भक्त को धीरे-धीरे पूर्ण समर्पण की स्थिति में ले जाती है। यही इस आरती की असली शक्ति है।
Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta – विशेष विश्लेषण
यह आरती केवल गणेश जी की स्तुति नहीं है। इसके अंत में जो श्लोक जुड़े हैं, जैसे “हरे राम हरे कृष्ण” और “अच्युतम केशवम,” वे बताते हैं कि हिंदू भक्ति परंपरा किसी एक देवता तक सीमित नहीं है। गणेश पूजा से शुरू होकर विष्णु-राम-कृष्ण के स्मरण तक, यह आरती पूरे हिंदू दर्शन का एक संक्षिप्त संस्करण है।
Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta च्या गाण्याचे बोल (मराठी में) सुनने वाले जानते हैं कि यह आरती गणेशोत्सव के दौरान महाराष्ट्र में हर घर में गाई जाती है। वहाँ यह केवल एक गाना नहीं, एक परंपरा है।
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निष्कर्ष (conclusion)
Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta सिर्फ एक गाना नहीं है यह एक भावनात्मक अनुभव है। जब Pamela Jain की आवाज़ में “सुखकर्ता दुखहर्ता” के बोल गूँजते हैं, तो मन उस दिव्य उपस्थिति की ओर खिंचता है जो हर विघ्न को दूर करती है।
Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics in Hindi हों या Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics English transliteration दोनों रूपों में यह आरती भक्त के हृदय तक उतनी ही गहराई से पहुँचती है।
अगर आप इसे पहली बार सुन रहे हैं, तो एक बार पूरी श्रद्धा के साथ सुनें। और अगर आप वर्षों से गाते आए हैं, तो आज इसके शब्दों का अर्थ भी जानें अनुभव बिल्कुल नया हो जाएगा।
? FAQs – Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics से जुड़े सामान्य प्रश्न
Q1: Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics किस एल्बम से हैं?
यह आरती “Ganesh Aarti” एल्बम का हिस्सा है जो Wings Entertainment Ltd ने प्रकाशित किया है।
Q2: Sukh Karta Dukh Harta का हिंदी में क्या अर्थ है?
“सुखकर्ता” का अर्थ है सुख देने वाले और “दुखहर्ता” का अर्थ है दुख हरने वाले। यह भगवान गणेश के दो सबसे मुख्य गुणों का वर्णन है जिनके कारण उन्हें हर शुभ कार्य में सबसे पहले पूजा जाता है।
Q3: Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics In Hindi में “मंगलमूर्ती” का क्या अर्थ है?
“मंगलमूर्ती” का अर्थ है शुभ और मंगल की प्रतिमा। गणेश जी को मंगलमूर्ती इसलिए कहा जाता है क्योंकि उनके स्मरण और दर्शन मात्र से सभी कार्य शुभ हो जाते हैं।
Q4: Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics English Transliteration कहाँ मिलेगी?
इस ब्लॉग पोस्ट में ऊपर Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta Lyrics English की पूरी transliteration दी गई है। इसमें हर श्लोक को Roman script में लिखा गया है ताकि जो हिंदी या मराठी नहीं जानते, वे भी आरती गा सकें।
Q5: Anjali Jain Sukh Karta Dukh Harta च्या गाण्याचे बोल मराठी में क्यों हैं?
यह आरती मूल रूप से मराठी परंपरा से आती है और महाराष्ट्र में गणेश पूजा की सबसे प्रमुख आरती है। मराठी भाषा में गणेश भक्ति की एक समृद्ध परंपरा है और यह आरती उसी का हिस्सा है। बाद में इसे हिंदी पंक्तियों के साथ मिलाकर पूरे भारत में लोकप्रिय बनाया गया।
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